कहते हैं कि फ़िल्में समाज का आईना होती हैं। बॉलीवुड में राजनीति को लेकर फ़िल्में बनाना आम बात हो गयी हैं. मनमोहन सिंह की बायोपिक की चर्चा अभी ख़त्म ही नहीं हुई थी कि नरेंद्र मोदी की बायोपिक लेकर विवेक ओबेरॉय हमारे सामने हैं|

बता दें पीएम मोदी की बायोपिक का फर्स्ट पोस्टर भी रिलीज किया जा चुका हैं। जिसमेँ विवेक ओबरॉय को पहचानना मुश्किल हो गया हैं|

हालांकि इस फिल्म पोस्टर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने टैगलाइन ‘देशभक्ति ही मेरी शक्ति है’ की टैग लाइन के साथ रिलीज किया हैं।

इस फिल्म को 23 भाषाओँ के साथ रिलीज किया जाएगा। हां इस फिल्म के पोस्टर को देख एक बात सके जहन में आती हैं कि पीएम मोदी के रोल में विवेक ओबेरॉय थोड़ा फिट नहीं बैठते हैं।

तो आइये आज इसी कड़ी में बात करते हुए आपको बताते हैं कि निर्देशक इस फिल्म में और किस-किस को मौका देकर और अच्छा कर सकते थे।

परेश रावल

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आता हैं बॉलीवुड के मंझे हुए कलाकार परेश रावल का। जोकि मौजूदा समय में गुजरात से पार्टी के सांसद भी हैं।

मोदी भी गुजरात से ही हैं। लेकिन इन सब के बीच सबसे बड़ी बात हैं कि इस अभिनेता के पास वो हुनर हैं जिसकी फिल्म को सख्त जरुरत हैं। इस फिल्म के लिए गुजरती अच्छी चाहिए। तो वो भी परेश रावल अच्छी बोल लेते हैं।

एक्टिंग के अलावा अगर कद काठी को भी देखा जाये तो भी यह अभिनेता उसमें फि बैठते हैं। इन सब चीज़ों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि पीएम मोदी के रोल के लिए परेश सबसे बेहतरीन अभिनेता साबित होते।

सन्नी देओल

मोदी जी की तरह ही सन्नी पाजी भी बॉलीवुड में अपने 56 इंच के सीने के लिए जाने जाते हैं। वो जिस अंदाज में विरोधी देशो के लिए अपना गुस्सा दिखाते हैं।

वो न सिर्फ देखने में अच्छा लगता हैं बल्कि देशभक्ति का भी संचार करता हैं। फिल्म के डायलॉग से लेकर 56 इंच के सीने तक सनी पाजी, मोदी से काफी हद तक मिले जुलते हैं।

इसलिए इन सब चीज़ों को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि निर्देशक इस फिल्म के लिए सन्नी के बारे में भी सोच सकते थे।

आशुतोष राणा

बॉलीवुड के इस अभिनेता में तो वो दम है। जोकि दर्शकों को अपनी एक्टिंग से सिनेमा घरो तक खींच लाते हैं। आशुतोष राणा के एक्स्प्रेस्शन की और डायलॉग डिलीवरी हमेशा की कमाल की होती है।

उनकी एक्टिंग न सिर्फ फिल्मों में जान डाल देती हैं। बल्कि दर्शकों को भी खूब लुभाती हैं। वैसे इस अभिनेता की हिंदी पर भी मोदी जी के जैसे अच्छी पकड़ हैं।

इसके अभिनय को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि विवेक की जगह फिल्म में आशुतोष राणा ही नरेंद्र मोदी बनने का मौका दिया जा सकता था।

आमिर खान बॉलीवुड की दुनिया में इस अभिनेता को मिस्टर परफेक्टनिस्ट के रुप में जाना जाता हैं। हालांकि आमिर के बारें में सबसे खास बात यह है, कि आमिर जिस भी अभिनय को करते हैं, उसमें जान डाल देता है।

नरेंद्र बायोपिक के लिए आमिर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते थे। इतना ही नहीं अगर निर्देशक उनको इस फिल्म के लिए कास्ट करते तो इसके भी कई सारे फायदे होते। जैसे डायलॉग बोलते समय उनके चेहरे के गंभीर भाव इस मूवी के लिए और ज्यादा बेहतरीन होते।

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