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दुनिया में तकरीबन 250 देश हैं जिनकी अपनी सरकार है, अपनी मुद्रा है और अपना झंडा है। लेकिन अगर हम आपसे कहें की इस दुनिया में एक देश ऐसा भी है जो है भी और नहीं भी। भले ही सुनने में ये बात बहुत ही अजीब लग रही हो मगर है बिल्कुल सच। हम बात कर रहे हैं हार्ट ऑफ एशिया के नाम से मशहूर ताइवान की, जिसका वजूद होते हुए भी नहीं है।

अपनी अद्भुत प्राकृतिक छटा और इलेक्ट्रानिक आइटम्स के लिए फेमस ताइवान एक ऐसा देश है जो जिसे एक देश के रूप में मान्यता नहीं मिली हुई है। अधिकारिक तौर पर इसका नाम है रिपब्लिक ऑफ चाइना। लेकिन इसे चीन का हिस्सा या फिर राज्य मानने की गलती ना करें। ये चीन से अलग देश है, जिसे हम चीन कहते हैं वह उसका अधिकारिक नाम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना है।

ताइवानदरअसल, चीन से 100 मील दूर स्तिथ ताइवान एक प्रजातंत्र है, जहां का मीडिया सशक्त और मानवाधिकार महत्वपूर्ण है। वहीं चीन ठीक इसके विपरीत गुणों वाला देश है। इसकी राजघधानी ताइपेई है। इस छोटे से देश की वित्तीय हालत बहुत ही मजबूत है। जिसका कारण है यहां पर फलता फूलता इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फैक्ट्रियां। अापने भी अपने  घरों में कई  इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर मेड इन ताइवान लिखा देखा होगा। मगर संयुक्त राष्ट्र संघ से इसे एक देश के रूप में मान्यता नहीं मिली हुई है।  ये है वो खिलौने जिनको लेकर हुआ था इतना बवाल कि इन्हें बाजार से मंगाना पड़ा था वापस

ताइवानइसकी सबसे बड़ी वजह है चीन जो ताइवान को अपना ही हिस्सा बताता है। वास्तव में ताइवान पहले संयुक्त राष्ट्र संघ का हिस्सा था, लेकिन जब से चीन को इसकी सदस्यता मिली तो इसने अपने राजनीतिक दबाव के चलते इसकी मान्यता खारिज करवा दी और इसे अपने ही देश का हिस्सा घोषित कर दिया। चीन अक्सर ताइवान को धमकाता रहता है। यही नहीं इसने अपनी कई मिसाइलों को ताइवान की तरफ टार्गेट कर रखा हुआ है। चीन की बढ़ते रुतबे कारण दूसरे देशों ने भी इससे अपने संबंध तोड़ लिए। इसलिए आज यह अकेले ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।

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