क्रिकेट के मैदान में वैसे तो कई बार ऐसे किस्से देखने या सुनने के मिलते हैं जिससे कोई खिलाड़ी अपने एक बड़े काम से करोड़ो लोगों का दिल जीत लेता है। इसमें खिलाड़ी अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि को भी नजरअंदाज कर किसी और खिलाड़ी के लिए एक मिसाल पेश करते हैं। मतलब साफ है कुछ खिलाड़ी होते हैं तो निःस्वार्थ भावना से अपने आप को लोगों का चहेता बना लेते हैं। क्रिकेट के इसी तरह की घटनाओं पर आज हम रोशनी डालते हैं जहां पर किसी खिलाड़ी ने मिसाल पेश की है।

रिचर्ड हेडली ने परफेक्ट टेन का किया त्याग

आपको ये तो याद ही होगा कि इंग्लैंड के स्पिन गेंदबाज जिम लेकर ने पहली बार परफेक्ट टेन का कारनामा किया है। इंग्लैंड के स्पिन गेंडबाज जिम लेकर ने साल 1965 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पारी के सभी 10 विकेट हासिल किए थे। इस रिकॉर्ड की बराबरी करने का बड़ा मौका  न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज रिचर्ड हेडली के पास था 1985 में रिचर्ड हेडली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जबरदस्त स्पेल करते हुए ऑस्ट्रेलिया की पारी के पहले 8 विकेट अपने नाम कर लिए थे

जिसके बाद हेडली के पास 34 साल में इस रिकॉर्ड की बराबरी करने का बड़ा मौका था, लेकिन वाघन ब्राउन नाम के उनके साथी खिलाड़ी की गेंद पर ऑस्ट्रेलिया का नौवा विकेट गिरा जो कैच रिचर्ड हेडली ने अपने परफेक्ट टेन करने के बड़े मौके का त्याग करके निःस्वार्थ भाव से ले लिया। इस पारी में हेडली ने 9 विकेट अपने नाम किए।

मार्क टेलर ने ब्रेडमैन के सम्मान में नहीं तोड़ा रिकॉर्ड

स्रवकालिन महान क्रिकेट सर डोनाल्ड ब्रेडमैन ने अपने करियर में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इसमें ब्रेडमैन ने रिकॉर्ड का एक एवरेट् खड़ा किया है। इसी तरह ही ब्रेडमैन ने दो तिहरे शतक लगाए हैं, जिसमें उनका बेस्ट स्कोर 334 रन है। ब्रेडमैन के इस रिकॉर्ड को तोड़ने का मौका एक बार साल 1998 में पूर्व कप्तान मार्क टेलर के पास था।

पाकिस्तान के खिलाफ मार्क टेलर ने नाबाद 334 रन बना लिए थे, लेकिन ब्रेडमैन के रिकॉर्ड के सम्मान में इसी स्कोर पर पारी घोषित करने सबसे बड़ी निःस्वार्थ भाव का सबूत दिया।

अनिल कुंबले के परफेक्ट टेन के कारण श्रीनाथ ने किया बड़ा त्याग

ये तो सभी जानते ही हैं कि भारत के महान गेंदबाज अनिल कुंबले ने एक बार परफेक्ट टेन का कारनामा किया है। साल 1999 में दिल्ली के मैदान में पाकिस्तान के खिलाफ अनिल कुंबले ने ये बड़ा रिकॉर्ड कामय किया। लेकिन अनिल कुंबले के इस रिकॉर्ड के पीछे उनके साथी खिलाड़ी जवागल श्रीनाथ का एक बड़ा त्याग भी माना जा सकता है।

कुंबले पहले से ही 9 विकेट ले चुके थे और कप्तान अजहर ने पारी का 60वां ओवर श्रीनाथ को दिया, लेकिन श्रीनाथ ने जानबूझ कर बाहर की तरफ गेंदे कर अपने ओवर को समाप्त किया। और श्रीनाथ ने कुंबले के लिए 10वां विकेट छोड़कर निःस्वार्थ दिखाया।

गौतम गंभीर ने अपना मैन ऑफ द मैच कोहली को देकर दिया बड़ा बलिदान

भारतीय क्रिकेट के दो क्रिकेटर गौतम गंभीर और विराट कोहली में हमेशा से ही रिश्ते सही नहीं रहे हैं और जमकर तकरार देखी गई है। विराट कोहली और गौतम गंभीर तो साल 2013 के आईपीएल में बीच मैदान में भिड़ बैठे थे लेकिन साल 2009 में श्रीलंका के खिलाफ एक मैच में गौतम गंभीर ने अपना प्लेयर ऑफ द मैच कोहली को प्रदान कर दिया।

इस मैच में भारत ने 315 रनों का टारगेट आसानी से हासिल कर दिया जिसमें गंभीर 150 रन बनाकर नाबाद लौटे थे वहीं कोहली ने भी सेंचुरी जड़ी। इन दोनों के बीच224 रनों की साझेदारी हुई। मैच के बाद गंभीर को प्लेयर ऑफ द मैच दिया गया लेकिन गंभीर ने इस अवार्ड को कोहली को देकर एक मिसाल पेश की।

रॉबिन उथप्पा ने रोहित की डबल सेंचुरी में निभायी बड़ी भूमिका

रोहित शर्मा के श्रीलंका के खिलाफ लगाए गए 264 रनों को कौन भूल सकता है। इस मैच में रोहित शर्मा ने जबरदस्त अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए रनों का एक बड़ा एवरेस्ट खड़ा कर दिया। रोहित शर्मा ने विश्व रिकॉर्ड तो कामय किया लेकिन इसमें उनके साथी रॉबिन उथप्पाा के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है।

भारत का चौथा विकेट 276 रनों पर गिरने के बाद उथप्पा बल्लेबाजी के लिए आए और भारत ने 404 रनों का स्कोर खड़ा किया लेकिन उथप्पा ने 15 गेंदो पर 15 रन बनाए और रोहित शर्मा ने 172 गेंद पर 264 रन बनाए। यानि उथप्पा ने पूरी साझेदारी के दौरान रोहित शर्मा के लिए अपने शॉट्स को रोकर एक-एक रन लेने में ही विश्वास किया।

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