हार और जीत किसी भी खेल का अहम हिस्सा होता है। पर सबसे अहम बात जो एक खेल के दौरान दिखाई जाती है वह है खेल भावना।इसके बगैर जीत या हार के मायने नहीं रह जाते। ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं,जब दो टीमों के बीच हुए मैच के दौरान एक टीम के हारने के बावजूद अपने अच्छे खेल भावना से हजारों प्रशंसकों का दिल जीत लेती है। वहीं ऐसे भी कई उदाहरण सामने देखने को मिले हैं,जिसने खेल भावना को तार-तार करते हुए पूरे खेल जगत को शर्मिन्दा कर दिया।

ऐसा ही कुछ भारत और श्रीलंका के बीच हुए सीरीज के आखिरी और तीसरे टेस्ट मैच के दौरान घटा,जब भारतीय टीम के बल्लेबाजों द्वारा किए गए शानदार प्रदर्शन के दबाव में आकर श्रीलंकन टीम ने खेल से भटकाव करते हुए खेलने से मना करने लगे और खेल भावना को पूरी तरह तार-तार कर दिया।

आईये आज हम आपको श्रीलंका टीम द्वारा भारत के खिलाफ उस इतिहास को उजागर करना चाहते हैं,जब उन्होंने खेल भावना को तार-तार कर टीम इण्डिया के खिलाफ खेल भटकाव करने की भरपूर कोशिश की।

जब श्रीलंका ने की तीन दिन की बल्लेबाजी

साल 1997 में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान श्रीलंका टीम के बल्लेबाजों ने भारतीय टीम के खिलाफ तीन दिनों तक बल्लेबाजी की,जिसे खेलने का कोई मतलब नहीं है। इसका प्रमुख कारण शुरूआती मजबूती के बाद जिस तरह से श्रीलंका ने तीन दिनों तक बल्लेबाजी की, उसे देखकर ऐसा ही लगा कि उनका ध्यान शुरूआत से ही मैच को ड्राॅ कराने पर रहा।

जब गांगुली को नहीं पूरा करने दिया शतक

श्रीलंका टीम ने साल 2001 में खेले गए मैच के दौरान उस वक्त खेल भावना को तार-तार कर दिया, जब भारतीय टीम के बल्लेबाज सौरव गांगुली क्रीज के दूसरी छोर पर 98 रन बनाकर मौजूद थे. वहीं क्रीज पर मोहम्मद कैफ बल्लेबाजी कर रहे थे।

पर इसी बीच श्रीलंकन गेंदबाज चमिंडा वास ने जानबूझकर गेंद को लेग स्टंप से काफी बार फेक दिया,जो काफी बाहर होने के कारण विकेट के पीछे चार रनों को चली गयी। उनका यह करना सौरव गांगुली का शतक नहीं बनाने के लिए था,जो खेल भावना के खिलाफ है।

जब वीरू को नोबाॅल से रोका शतक जड़ने से

श्रीलंका का इतिहास खेल से भटकाव लाकर मैच में बाधा पहुंचाने का काफी पुराना रहा है। साल 2010 में जब धाकड़ बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग बल्लेबाजी कर रहे थे तो उन्हें अपने शतक को पूरा करने के लिए महज एक रनों की दरकरार थी,वहीं दूसरी तरफ भारतीय टीम को जीत के लिए भी 1 रनों की जरूरत थी। पर इसी बीच श्रीलंकाई गेंदबाज रनदीव ने जानबूझकर नो बाॅल फेंक दी और सहवाग को शतक बनाने से रोक दिया।

एक बार फिर किया खेल भटकाव की कोशिश

मौजूदा समय में चल रहे तीसरे टेस्ट मैच के दौरान एक बार फिर श्रीलंकाई टीम ने अपने पुराने इतिहास को दोहराते हुए खेल भटकाव की भरपूर कोशिश की।

जब भारतीय टीम के बल्लेबाजों ने शानदार खेल का प्रदर्शन दिखाते हुए स्कोर को 500 के पार पहुंचा दिया और वहीं दूसरी तरफ विरोट कोहली अपने दोहरे शतक से भारत को एक पहाड़ जैसे स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश करने लगे, तो श्रीलंका टीम मैदान पर मास्क लगाकर आयी और पल्यूशन का बहाना बनाते हुए अंपायर के सामने क्रिकेट खेलने से इंकार करने की बात कहने लगी। चल रहे इस ड्रामेबाजी के बाद श्रीलंका टीम ने खुद को खेल भावना के खिलाफ जाकर लेने वाले टीम की तरह बना दिया।

 

 

 

 

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