Fromer captian of Indian blind team now unemployed

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसने कई खिलाड़ियों को अर्श से फर्श तक पहुंचा दिया. इस खेल में अकूत दौलत है और खिलाड़ी खेल के मैदान में आने के बाद पैसों से मालामाल हौ जाते हैं. लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा भी है जो आज दर-दर भटक रहा है एक नौकरी की तलाश में है और उसको कोई मदद नही कर रहा है. जी हां यह बिलकुल सत्य है जिसको सुनकर आपको काफी हैरानी हो रही है. यहीं नही इस खिलाड़ी ने भारत को दो बार वर्लडकप भी जिताया है. आईए आपको बताते हैं इस खिलाड़ी की दास्तां जिसको सुनकर आपकी आंखे नम हो जाएंगी. 

 

दो बार जिताया है वर्लडकप

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आज हम आपको उस भारतीय खिलाड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने भारत को द्रष्टिहीन क्रिकेट चैंपियनशिप में वर्लडकप जिताया है. लेकिन आज वह रोजगार के लिए लोगों से मदद मांग रहा है. इस खिलाड़ी का नाम शेखर नाईक है जो आज अपने परिवार का पालन-पोष्ण के लिए नौकरी की तलाश में है. रिपोर्टस के मुताबिक इन दिनों यह खिलाड़ी काफी मजबूरी में है और नौकरी की तलाश कर रहा है.

30 साल की उम्र में छोड़ा क्रिकेट

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13 सालों तक भारतीय टीम के साथ खेलने के बाद शेखर ने मैच से दूरी बना ली. इसके बाद वह कुछ दिनों के लिए एक एनजीओ के साथ जुड़ गए और कई दिनों तक वहीं नौकरी की. इसके कुछ दिनों बाद निजी कारणों से इस नौकरी को छोड़ना पड़ा और तब से वह किसी अच्छी नौकरी की तलाश में हैं लेकिन उनको नौकरी नही मिली. शेखर की अगुआई मेे पहली बार भारतीय टीम ने बैंगलौर में विश्र्व कप जीता था. साथ ही साल 2014 में केपटाउन में वनडे क्रिकेट विश्वकप जीता था.

घरवालों को लेकर चिंतित 

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शेखर कहते हैं कि वह जब कभी बाहर जाते हैं और उनकी तारीफ़ में कोई कुछ बोलता है तो काफी ख़ुशी महसूस होती है. लेकिन वापस जब घर को लौटता हूँ तो घरवालों को देखकर चिंता होती है. पत्नी और बेटियों के भविष्य को लेकर मन में तरह-तरह के खयाल आते हैं. वह कहते हैं की मैनें कई सांसदो औऱ विधायकों से नौकरी को लेकर बात की और उनसे गुजारिश भी की, बाद में उन लोगों ने मुझे आश्वाशन भी दिया. लेकिन अभी तक वह बेरोजगार हैं और नौकरी की नलाश कर रहे हैं. शेखर का कहना है कि, वह सरकार से गुजारिश करते हैं कि उन्हे उनकी योगता के अनुसार नौकरी दे दी जाए.

जन्म से ही नही है आंखो में रोशनी

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बता दें कि शेखर की आँखों में बचपन से ही रोशनी नहीं है. उनका बचपन ही अंधकार में बिता है और वह बचपन से ही बिना रौशनी के अपनी जिंदगी जिए हैं. शेखर का जन्म कर्नाटक में हुआ और वह शारदा देवी स्कुल फॉर ब्लाइंड में पढ़ते समय ही क्रिकेट खेलना सिखे और इसके बाद से वह क्रिकेट खेलते आ रहे हैं. सन 2000 में शेखर कर्नाटक टीम में शामिल हुए और इसके बाद दो साल बाद 2002 में वह भारतीय टीम में शामिल हो गए.

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