कैशलेस इकोनॉमी की तरफ तेजी से बढ़ रहे देश के लिए पीओएस यानी प्वाइंट ऑफ सेल मशीन एक महत्वपूर्ण हथियार साबित हो रही है। इस मशीन की मदद से उपभोक्ता किसी भी सर्विस या खरीदारी का भुग्तान तुरंत अपने एटीएम या क्रेडिट कार्ड के जरिये कर कर सकते हैं। वहीं नोटबंदी के बाद से ही बाजार में पीओएस मशीनों की मांग पांच गुना तक बढ़ गई है।

43 फीसदी का इजाफा

देश में नोटबंदी के बाद नकदी की कमी से जूझ रहे लोगों ने तेजी अपना रुख कार्ड के ज़रिये पेमेंट करने की तरफ किया है। यही वजह है कि नोटबंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। आठ नवंबर से पहले जहां क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए पीओएस मशीन पर औसतन हर दिन 1221 करोड़ रुपये का लेन-देन होता था, वहीं 26 दिसंबर को बढकर 1751 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार के इस चौका देने वाले फैसले के बाद पीओएस मशीनों के जरिये होने वाली पेमेंट में 43 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है।  जानिए किसने किया था एटीएम का आविष्कार, इस शख्स का था भारत से गहरा सम्बन्ध

तेजी से बढ़ रही है मांग

इन मशीनों का इस्तेमाल पहले जहां बड़े-बडे मॉल और व्यापारी करते थे वहीं नोटबंदी के बाद से ही छोटे और मझोले व्यापारियो में भी इसकी डिमांड होने लगी है। पीओएस मशीन बनाने वाली एक कंपनी पाइनलैब ने बताया है कि पहले एक महीने में वह पांच हजार पीओएस मशीनें बनाकार सेल करती थी। लेकिन नवंबर के बाद से इसमें जरबरदस्त मांग देखने को मिली है और ये आंकड़ा 30 हजार तक पहुंच गया है। अगर औसत की बात करें तो पहले हर वर्ष औसतन दो से तीन लाख मशीनों की मांग थी पर अब कंपनी ने दावा किया है कि आनेवाले समय में ये मांग 10 लाख तक पहुंच सकती है। अगर आप भी करते है कैशलेस ट्रांजिकशन तो यह खबर आपके लिए

पाइनलैब ने बताया की पीओएस मशीन को लगवाने और उसके बारे में जानकारी लेने वालों कि उनके पास रोजाना 3 हजार कॉल्स आ रही हैं। यही वजह है कि सरकार ने भी कैशलेस लेन-देन को सुविधाजनक बनाने के लिए बैंकों को 31 मार्च, 2017 तक 10 लाख और नये पीओएस टर्मिनल लगाने का निर्देश दिया है।

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