भारत में लोगो के बीच 2 ही चीज को लेकर दीवानगी देखने को मिलती हैं, इसमें पहला है क्रिकेट और दूसरा है फिल्मे. भारत में लोग इन दोनों चीजो के लिए इतने क्रेजी है, कि इसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. हालाँकि आपको ये पता ही होगा सिनेमाघर में फिल्मे तभी आती हैं, जब उन्हें सेंसर बोर्ड पास करे.

सेंसर बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद ही ये फिल्मे भारत में प्रदर्शित की जाती हैं, लेकिन अगर किसी फिल्म पर सेंसर बोर्ड ने रोक लगा दी तो इसे आप सिनेमाघरो में नहीं देख सकते हैं, लेकिन यू-ट्यूब पर ये फिल्मे आसानी से देखने को मिल जाती हैं.

1.बेंडिट क्वीन

बेंडिट क्वीन एक रियल घटना पर आधारित फिल्म हैं, जिसे अपने समय की प्रख्यात डकैत फूलन देवी के उपर बनाया गया हैं. इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने सिनेमाघर में प्रदर्शित नहीं होने दिया, लेकिन यू-ट्यूब पर यह फिल्म आसानी से उपलब्ध हैं.

यह फिल्म नीचे जाति से सम्बन्ध रखने वाली एक ऐसी महिला की है, जिसका सामान्य वर्ग के कुछ समृद्ध लोगो द्वारा आबरू लुटी जाती हैं. अपने द्वारा हुए इस कृत का बदला लेने के लिए वो बीहड़ में चली जाती है और सबसे अपना बदला लेती हैं.

2. कामसूत्र-3D

अपने नाम के अनुरूप इस फिल्म ने दृश्य भी समेटे हुए थे, इस फिल्म ने सभी मर्यादा को तोड़ कामुक दृश्यों को अपने में इस कद्र समेटे हुए था, कि सेंसर बोर्ड ने इसे लाल झंडी दिखा दी.

रुपेश पॉल द्वारा डायरेक्ट की गयी यह फिल्म 2013 में ही सिनेमाघर में रिलीज होने वाली थी, लेकिन आज तक यह फिल्म दर्शको तक नहीं पहुंच सकी, फिर भी अगर आप इस फिल्म को देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म यू-ट्यूब पर आसानी से उपलब्ध हैं.

3.अनफ्रीडम

अनफ्रीडम को सेंसर बोर्ड ने भी फ्री नहीं किया. राज अमित कुमार द्वारा डायरेक्ट की गयी यह फिल्म मई 2015 में  ही सिनेमाघर में रिलीज होने वाली थी, लेकिन इसकी कहानी और दृश्य सेंसर बोर्ड को बिल्कुल भी पसंद ना आई.

यह फिल्म 2 महिलाओ के आपसी सम्बन्ध को लेकर था. इस फिल्म में दो लड़कियां दुनिया की परवाह किये बिना एक दुसरे के साथ सम्बन्ध बनाती हैं. इस फिल्म में ऐसे दृश्यों की भरमार थी, जो किसी भी मानव मस्तिष्क को विचलित कर दे. इस फिल्म ने अपने अंदर ऐसे दृश्यों को समाहित किया हुआ था, जिसे आप परिवार के साथ बिल्कुल भी नहीं देख सकते हैं. ऐसे में सेंसर बोर्ड ने इसे लोगो के सामने लाना मुनासिब नहीं समझा. यह फिल्म सिर्फ यू-ट्यूब तक ही सिमट कर रही गयी.

4.पांच

अनुराग कश्यप द्वारा लिखी और डायरेक्ट की गयी यह फिल्म 21 सितम्बर 2003 में ही रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर बोर्ड को अनुराग की यह फिल्म बिल्कुल भी पसंद नहीं थी, इसलिए समाज के लिए इस फिल्म को खतरा बताते हुए सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को बैन करना ही मुनासिब समझा.

केके मेनन, आदित्य श्रीवास्तव, विजय मौर्या और तेजस्वनी कोल्हापुरी जैसे स्टार से सजी यह फिल्म एक क्राइम एडल्ट फिल्म थी, लेकिन इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने सिनेमाघर में रिलीज होने की अनुमति नहीं दी. यही वजह हैं, कि इसे आप अब सिर्फ यू-ट्यूब पर देख सकते हैं.

5. यूआरएफ प्रोफेसर 

सेंसर बोर्ड को इस फिल्म से भी कोई जातीय दुश्मनी नही थी, लेकिन फिर भी उन्हें यह फिल्म सिनेमाघर में रिलीज होने से रोकनी पड़ी. ऐसा करने के पीछे सेंसर बोर्ड के पास मकसद साफ़ था, फिल्म में आपत्तिजनक दृश्यों की भरमार थी, जिसे आप परिवार के साथ बिल्कुल भी नहीं देख सकते हैं.

निर्माता पंकज आडवाणी की ये फिल्म 2001 में रिलीज होनी थी, लेकिन आज तक यह फिल्म ठंडे बस्ते में ही हैं. यही वजह हैं, की इसे देखने के लिए अब आपको यू-ट्यूब का ही सहारा लेना पड़ेगा. फिल्म में मसहूर एक्टर शर्मन जोशी के अलावा मनोज पहवा और अनंत माली मुख्य भूमिका में थे.

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