संतान सुख
happy mother with cute newborn baby

नई दिल्ली! हमारे देश में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो संतान सुख से वंचित हैं. वह संतान की प्राप्ति के लिए डॉक्टर, वैध और तरह-तरह के पूजा-पाठ कराते हैं. लेकिन तब भी कोई फायदा नहीं होता है. निसंतान दम्पति को कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है खासकर महिलाओं को लोग इतनी अजीब नजर से देखते हैं.

संतान सुख

उन्हें घरवाले के ताने भी सुनने पड़ते हैं. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि दम्पति के किस्मत में संतान सुख का योग होता ही नहीं है. लेकिन आज हम आपको बताएंगे ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस व्रत के करने से कैसे संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है.
ऐसा बताया गया है कि यह व्रत चन्द्र मास की त्रयोदशी के दिन किया जाता है, यह व्रत शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है इस व्रत को प्रदोष व्रत के नामा से भी जाना जाता है.

ग्रंथों के अनुसार बताया गया है अगर आप इस व्रत को पूरी लगन और शिद्द्त के साथ केवल तीन महीनों तक करते है तो इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति के योग बन सकते है. ऐसा कहा गया है कि प्रदोष व्रत के दिन सूर्य उदय से पूर्व उठकर हो सके तो गंगा स्नान या फिर किसी नदी में स्नान करें. उसके बाद भगवान शिव का मन लगाकर व्रत करें.

व्रत करने के पश्चात पूजन स्थल को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद, गाय के गोबर से लीपकर, मंडप तैयार किया जाता है. पूजा करने के दौरान आप उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और फिर पूजा शुरू करें. इस व्रत को विधि प्रकार करने से जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है.

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