करवाचौथ का व्रत

मुंबई! करवाचौथ का व्रत सभी सुहागन महिलाएं अपने पति के लंबी उम्र के लिए रहती हैं. करवाचौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है. कार्तिक मास की चतुर्थी जिस रात रहती है उसी दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है. यह व्रत पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक होता है. यह व्रत इस साल 27 अक्टूबर को किया जाएगा. इस दिन सभी सुहागन स्त्रियां खूब तैयार होकर हाथों में मेहँदी लगाकर पूजा करके पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ती हैं.

करवाचौथ का व्रत

लेकिन चलिए आज हम आपको बताएंगे इस व्रत में सुहागन स्त्रियां छलनी में पहले चाँद की और फिर पति का चेहरा क्यों देखती हैं. करवा चौथ के दिन छलनी का काफी महत्व होता है. पूजा की थाली में महिलाएं सभी सामानों के साथ छलनी को भी रखती हैं. दरअसल करवा चौथ की रात महिलाएं अपना व्रत पति को इसी छलनी से देखकर पूरा करती हैं. इस छलनी में शादी-शुदा महिलाएं दीपक रख चांद को देखती हैं और फिर उसके बाद अपने पति का चेहरा देखती हैं. जिसके बाद पति उन्हें पानी पिलाकर व्रत पूरा कराते हैं.

इस पूरी प्रक्रिया की एक बड़ी खास वजह है. हिंदू मान्यताओं के मुताबिक चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता है और चंद्रमा को लंबी उम्र का वरदान भी हासिल है. साथ ही चांद में सुंदरता, प्रसिद्धि, शीतलता, प्रेम और लंबी उम्र जैसे गुण भी हैं. इस कारण से ही शादीशुदा महिलाएं चांद को देखकर इन सभी गुणों की कामना अपने पति के लिए करती हैं.

करवा चौथ का पूजन

करवा चौथ के व्रत में पूजन के समय धातु के करवे का पूजन श्रेष्ठ माना जाता है. यथास्थिति अनुपलब्धता में मिट्टी के करवे से भी पूजन का विधान है. गाँव में ऐसा माना जाता है कि करवा चौथ के पूजन के दौरान ही सजे-धजे करवे की टोंटी से ही जाड़ा निकलता है. करवा चौथ के बाद पहले तो रातों में धीरे-धीरे वातावरण में ठंड बढ़ जाती है और दीपावली आते-आते दिन में भी ठंडक का एहसास होने लगता है.

पूजन मुहूर्त

 करवा चौथ पूजा मुहूर्त- सायंकाल 6:37- रात्रि 8:00 तक चंद्रोदय- सायंकाल 7:55 चतुर्थी तिथि आरंभ- 18:37 (27 अक्टूबर) चतुर्थी तिथि समाप्त- 16:54 (28 अक्टूबर)

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