परम्पराएं

मुंबई! हमारी इस दुनिया में कई तरह के लोग और कई तरह की परम्पराएं भी है. कुछ लोग सदियों से चली आ रही अपनी परम्परा और संस्कृति को मानते हैं तो वहीँ कुछ लोग लोग उसे भूल जाते हैं चलिए आज हम आपको कम्बोडिया के लोगों के एक परम्परा के बारे में बताएंगे. जिसके बारे में सुनकर और जानकार आपको बड़ा मज़ा आएगा.

परम्पराएं

आपको बता दें कम्बोडिया में कंबोडियन जल उत्सव की परंपरा बहुत पुरानी है लेकिन वहां के लोग नहीं बल्कि पूरा देश आज भी उनकी इस परम्परा को मानता है. वहां के लोग इस उत्सव में चंद्रमा के प्रति अपना आभार प्रकट करते हैं. यह देश विश्व प्रख्यात मंदिरों के लिए जाना जाता है. आपको यहाँ पर अनोखे पेड़ और ढेर सारी खूबसूरत नदियां और झीलें भी देखने को मिलेंगी. यहां की कुछ ऐसी परंपराएं, त्योहार और प्रथाएं भी हैं, जो इसे और खास बनाती हैं.

कम्बोडिया के इस त्यौहार में सिर्फ नौकायन ही नहीं बल्कि नाव में ही लोग नाचते, गाते भी हैं. बड़ी-बड़ी नाव और टिमटिमाती रोशनी के बीच नदी में कई दीये और कृत्रिम नाव से भरी टनल सैप नदी, चारों तरफ जश्न मनाते लोग आपको यहीं दिखेंगे. बॉन ओम टॉक या कंबोडियन वॉटर फेस्टिवल, नवंबर में मनाया जाने वाला एक खास त्योहार है. नवंबर में तीन दिनों तक यह जल उत्सव चलता है, जिसे पेन्ह शहर के रॉयल पैलेस के सामने मनाया जाता है. कहते हैं यह महोत्सव पहली बार 12वीं शताब्दी में अंकोर राजा जयवर्मन सप्तम के समय मनाया गया था.

dragon boat race

राजा की नौसेना ने कंबोडिया में मछली पकड़ने के समय कुछ लोगों की मदद की थी. वहां के लोगों का यह भी मानना है कि इस उत्सव से देवता प्रसन्न हो जाते हैं .जिससे आने वाले वक्त में वह चावल और मछली की अच्छी उपज देते हैं. इसके अलावा एक और कहानी जो प्रसिद्ध है, वह यह कि उस दौरान राजा-महाराजा द्वारा युद्ध के लिए अपनी नौसेना को तैयार करने का एक तरीका था. इस उत्सव में लोग नाव की रेस में भाग लेते हैं. चंद्रमा का अभिवादन करते हैं और केले या नारियल के रस से बने विशेष तरह के चावल का सेवन करते हैं.

आपको बता दें इस फेस्टिवल में जो लोग भाग लेते हैं वे लोग कुछ दिन पहले आकर नदी में नाव चलाने का अभ्यास करते हैं. इन नौकाओं को प्रायः व्यक्तिगत दान-दाताओं और सरकारी अधिकारियों द्वारा प्रायोजित किया जाता है. इस उत्सव के दौरान कंबोडिया में विभिन्न सरकारी मंत्रालय अपनी खुद की बड़ी रोशनी वाली नौकाएं भी बनाते हैं और शाम को आतिशबाजी का नजारा तो देखते ही बनता है. जो लोग रेसिंग करते हैं वहां के बच्चों का समूह उनके ऊपर पानी फेकते हैं और ढेर साड़ी मस्ती भी करते हैं.

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