चप्पल

मुंबई! आजकल इस फैशन के दौर में कपड़ों से मैचिंग सैंडिल, चप्पल, जूते पहना करते हैं. आजकल आम आदमी के पास भी 2-4 जोड़ी चप्पल तो होते ही हैं. लेकिन जो बड़े लोग होते हैं या जो इन चीजों के शौक़ीन होते हैं वो इन पर लाखों, करोड़ों रूपये खर्चकरते हैं.

लेकिन हम आपको बता दें पहले के लोग चप्पल पहनना कम पसंद करते थे. लेकिन आज चप्पल और जूते फैशन के साथ-साथ जरूरत बन चुके हैं. लेकिन आज आपको यहां ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां जूते चप्पल पहनने के नाम पर लोग गुस्सा करने लगते हैं.

इस बात को सुनकर आप सोच रहे होंगे कि ये कैसे हो सकता है तो हम आपको बता दें कि मदुराई से 20 किलोमीटर दूर एक ऐसा गांव है जहां पर लोगों को जूते चप्पल पहनना मना है. इस गांव का नाम कलिमायन है.

इस गांव में वर्षों से लोगों ने अपने पैर में चप्पल या जूते नहीं पहने हैं. यहां तक की इस गांव के लोग अपने बच्चों को भी इसे पहनने से मना करते हैं. इस गाँव में अगर कोई गलती से भी जूते पहन लेता है तो उसे कठोर सजा सुनाई जाती है.

आपको बता दें जूते चप्पल न पहनने के पीछे लोगों का अपना एक तर्क है. इस गांव के लोग अपाच्छी नाम के देवता की सदियों से पूजा करते आ रहे हैं. उनका मानना है कि अपाच्छी नाम के देवता ही उनकी रक्षा करते हैं. वे लोग अपने इस देवता के पीछे आस्था दिखाने के लिए गांव की सीमा के अंदर जूते-चप्पल पहनकर नहीं जाते हैं.

इस गांव के लोग कई पीढ़ियों से इस परंपरा को निभाते चले आ रहें हैं. अगर गांव के लोगों को कही जाना होता है तो हाथ में चप्पल लेकर गांव की बाहर जाकर पहन लेते हैं.

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