त्योहार

मुंबई! पूरी दुनिया संस्कृतियों और अलग-अलग त्योहारों के लिए जाना जाता है. पश्चिमी देशों में पूर्वजों की याद में हैलोवीन नाम का एक त्योहार मनाया जाता है. यह त्यौहार सभी त्योहारों से बिल्कुल अलग है. क्योंकि इस खूबसूरत त्यौहार को मनाने का अंदाज बेहद अलग है.

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इस देश में भी लोग अच्छे-अच्छे कपडे पहनकर तैयार होते हैं. लेकिन इनका मेकअप बहुत अलग होता है. जिसे देखने के बाद आप डर भी सकते हैं. सभी लोग थीम के अनुसार ड्रेस के साथ भूतों की तरह सजते-संवरते हैं.

हैलोवीन पश्चिमी देशों में ईसाइयों द्वारा धूमधाम से मनाया जाने वाला त्यौहार है, जोकि अक्टूबर के आखिरी रविवार को मनाया जाता है, लेकिन अब की बार 28 अक्टूबर को मनाया गया. इस त्यौहार के लिए सभी अपने-अपने अंदाज में तैयारियां करते हैं. वहींसभी लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी करते हैं. आपको बता दें इस त्यौहार की शुरुआत आयरलैंड एवं स्कॉललैंड से हुई थी.

यूरोप में सैल्टिक जाति के लोग मानते थे कि इस समय मृत लोगों की आत्माएं आकर संसारिक प्राणियों से साक्षात्कार करती हैं. वह हमेशा सोचते थे कि उनके पूर्वजों की आत्मा धरती पर आएंगी  इसीलिए इस जाति के लोग चुड़ैल बनते और जानवरों के मौखटे, उनकी चमड़ी, उनके सिर पहनकर अलाव के आस पास नाचते गाते हैं. वे मानते हैं कि कोई विशिष्ट सर्वोच्च प्राकृतिक शक्ति है.

हैलोवीन डे पर सभी लोग लालटेन जलाने का भी काम करते हैं. इसके पीछे कंजूस जैक और शैतान की आयरिश लोककथा मानी जाती है. आयरलैंड में जन्मे कंजूस शराबी जैक ने अपने एक शैतान दोस्त को घर में शराब पीने के लिए लाया, लेकिन वो नहीं चाहता था कि अपना पैसा खर्च करे. उसने अपने दोस्त को शराब के बदले घर में लगा कद्दू देने की बात कही बाद में वह अपनी बात से मुकर गया.

जिसके बाद उसके दोस्त को गुस्सा आ गया. और उसने कद्दू से रावनी लालटेन बनाकर घर के बाहर पेड़ पर टांग दिया, जिस पर उसके मुंह की नक्काशी की और जलते कोयले डाल दिए. तब से दूसरे लोगों के लिए सबक के तौर पर इस दिन जैक-ओ-लालटेन का चलन शुरू हो गया. ऐसा कहा जाता है कि उनके पूर्वजों की आत्माओं को रास्ता दिखाने और बुरी आत्माओं से रक्षा करने का यह सबसे अच्चा प्रतीक है.

 

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