विश्व क्रिकेट में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अंडर-19 विश्वकप के तौर पर एक मंच दिया जाता है. ताकि जूनियर खिलाड़ी अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में आने से पहले खेल सके और अच्छा प्रदर्शन करके आत्मविश्वास पा सके.

दुनिया के बहुत से खिलाड़ियों ने अंडर-19 विश्वकप के मंच के जरिये भारतीय टीम में जगह बनाई भी है, इसका सबसे बढ़िया उदहारण 2008 में भरतीय टीम को अंडर-19 विश्वकप दिलाने वाले भारतीय कप्तान विराट कोहली ही रहे है.

क्रिस गेल और युवराज सिंह भी बढ़िया उदाहरण

साथ ही इस अंडर-19 विश्वकप टूर्नामेंट के दो और बढ़िया उदाहरण क्रिस गेल और युवराज सिंह रहे है. क्रिस गेल जहां इस टूर्नामेंट में 2008 में प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट रहे थे. वही युवराज सिंह भी 2010 में इस अंडर-19 विश्वकप टूर्नामेंट में  प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट का खिताब जीत चुके है.

कुछ हो जाते है गुमनाम 

हालाँकि अंडर-19 में से कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे है, जो अंडर-19 क्रिकेट में तो धूम मचा देते है, लेकिन जब उन्हें घरेलू स्तर पर रणजी ट्रॉफी जैसा टूर्नामेंट खेलने को मिलता है, तो वह अपने आप को साबित नहीं कर पाते है और क्रिकेट की दुनिया से गुमनाम हो जाते है.

फाइनल मैच में ‘मैन ऑफ़ द मैच’ रहने वाले को मिली सरकारी नौकरी

2008 के फाइनल मैच में मात्र 7 रन देकर 2 विकेट निकालकर ‘मैन ऑफ़ द मैच’ रहे अजितेश अरगल का करियर आगे काफी निराशाजनक रहा.

अंडर-19 में तो अजितेश अरगल का प्रदर्शन बहुत शानदार रहा, लेकिन जब उन्हें बड़ौदा से घरेलू क्रिकेट खेलने को  मिला तो वह खुद को साबित नहीं कर पाये और 10 मैच के बाद ही टीम से बाहर हो गये. अजितेश वर्तमान में बड़ौदा आयकर विभाग में बतौर इंस्पेक्टर काम कर रहे है.

2008 का विकेटकीपर बेच रहा छोले-भठूरे

पैरी गोयल 2008 में भारत की अंडर-19 टीम के विकेटकीपर थे. वह पंजाब के लिए भी घरेलू क्रिकेट खेले, लेकिन उनका पंजाब के लिए बहुत निराशाजनक प्रदर्शन रहा. जिसके बाद उन्हें 2010 में टीम से बाहर कर दिया गया.

टीम से बाहर होने के बाद पैरी गोयल को लेकर ख़बरें ऐसी है कि आज वर्तमान में उन्होंने लुधियाना नगर निगम के पास फ़ास्ट फ़ूड की एक शॉप खोली हुई है. उस दुकान पर पैरी गोयल चाउमीन, मोमो, छोले-भठूरे जैसी चीज बेच रहे है और अपना गुजारा चला है.

यहाँ देखे विराट का क्रिकेट सफर 

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