यूपी में ATS ने एक सेना की जासूसी में शामिल इंटरनेशनल कॉल रैकेट का भंडाफोड़ किया है इस मामले में यूपी एटीएस ने यूपी के अलग-अलग हिस्सों और एनसीआर से 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, इन सभी को देश के खिलाफ युद्ध भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया है। 

बताया जा रहा है कि यह यह ग्रुप पाकिस्तान, नेपाल, यूएई और बांग्लादेश से फोन करने वालों को कथित तौर पर जम्मू और कश्मीर में सैन्य अभियानों के बारे में जानकारी लेने में मदद करता था और यह जासूसी के लिए इंटरनेशनल बाईपास फ्रॉड का सहारा लेता था। साथ ही तकनीक की सहायता से यह फोन करने वालों के नाम छिपा देते थे।

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2 महीने पहले मिली थी जानकारी-

दरअसल उत्तरप्रदेश एटीएस को जम्मू और कश्मीर मिलिट्री इंटेलिजेंस यूनिट के जरिए दो महीने पहले जानकारी मिली थी जिसमें करीब 2 दर्जन इंटरनेट कॉल रेकॉर्ड्स की जांच करने को कहा गया था। यूपी एटीएस के इंस्पेक्टर जनरल असीम अरुण ने बताया, कि ‘जम्मू और कश्मीर में अहम जगहों पर तैनात सैन्य अधिकारियों को लैंडलाइन और मोबाइल नंबरों से फोन आ रहे थे  और ये लोग खुद को सेना के बड़े अफसर बताकर कुछ खास जानकारियां मांगते थे। सेना के अफसरों को इन पर शक नहीं होता था और वे उनकी मांगी गई सूचनाओं को उनसे साझा कर देते थे।

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जांच में हुआ खुलासा- 

दरअसल इन नंबरों की जांच की गई और तभी सामने आया कि कि सेना के अधिकारियों के मोबाइल फोन पर VoIP ट्रैफिक के जरिए फोन आए थे, जो दूरसंचार विभाग द्वारा अवैध घोषित हैं। जिसके बाद ही यूपी एटीएस ने टेलिकॉम विभाग से संपर्क किया जिसमें पता चला कि सैन्य अधिकारियों को विदेशों से इंटरनेट कॉल्स किए गए थे। इसमें यूपी के अलग-अलग जगहों से पकड़े गए ग्रुप ने तकनीकी मदद दी थी। दिल्ली का गुलशन सेन लखनऊ, हरदोई और सीतापुर के तीन अवैध टेलिफोन ऐक्सचेंजों को तकनीकी मदद मुहैया कराता था।

आपको बता दें कि पूरे मामले में एटीएस की 5 टीमें लगी हुंई थी। टीमों ने इस कॉले रैकेट ग्रुप से  10 मोबाइल फोन, 16 सिमबॉक्स और अलग-अलग कंपनियों के 140 प्रीपेड सिम कार्ड्स जब्त किए हैं।  इसके अलावा पुलिस ने 5 लैपटॉप और 28 डेटाकार्ड्स को अपने कब्जे में लिया है। ग्रुप के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है

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